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उपचुनाव से पहले बिहार कांग्रेस गर्म, गोहिल और झा का भारी विरोध

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हरियाणा की रार अभी चल ही रही है। कल एआईसीसी में हरियाणा प्रभारी गुलाब नबी आजाद ने सूबे की राजनीति में पार्टी टूटने की सारी संभावनाओं पर पूर्ण विराम लगा दिया। राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर अपनी दावेदारी ठोक रही कुमारी शैलजा को प्रदेश का अध्यक्ष और सोनिया दरबार ने घुटने टेकवाने के बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा को एक रणनीति के तहत चुनाव अभियान समिति के साथ सदन का नेता बना दिया। आजाद ने अपने लंबे अनुभव का इस्तेमाल करते हुए हुड्डा को घुटने टिकवाते हुए अंतरिम अध्यक्ष बनी सोनिया गांधी को लंबी मशक्कत के बाद पार्टी को टूट से बचाने का फार्मूला बताते हुए इस बात के लिए राजी कर लिया कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री को एक मौका दिया जाना चाहिए। इसी का सियासी फायदा उठाने में बिहार में दोबारा लूट-पाट और टिकट बेचो अभियान में खासा नाम व माल बटोर चुके शक्ति सिंह गोहिल और उनकी चौकड़ी फर्जीवाड़ा करते हुए फिर से जुट गई।

अनंत सिंह के साथ शक्ति सिंह गोहिल और मदन मोहन झा की सौदेबाजी का असर बिहार कांग्रेस के साथ-साथ इस बाहुबली विधायक को भी भुगतना पड़ रहा है। अनंत फिलहाल बिहार पुलिस की हिरासत में हैं। इसी दौरान उनका नाम पूर्व कांग्रेसी सांसद की हत्या मामले में उनका नाम निकल कर आ रहा है। उनकी स्वीकारोक्ति के साथ वीडियो बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है। इसको लेकर बिहार पुलिस ने 15 साल पुराने इस मामले की जांच को नए सिरे से खोल दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा और एमएलसी प्रेमचंद मिश्रा इनके बचाव में कूदने से बिहार कांग्रेस की किरकिरी हो रही है। मदन मोहन झा मोकामा के विधायक अनंत सिंह को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पुलिस प्रशासन को उनके प्रति नरम रूख अपनाने की गुजारिश करते रहे हैं।

नोट : इस लेख के साथ गोहिल के साथ हुई पिटाई और बदसलूकी के कई नामचीन चैनलों के वीडियो भी संलग्न हैं।

अनंत सिंह का दिल्ली और पटना के पाटलिपुत्र स्थित आलीशान होटल में इन प्रभारियों के लिए ऐशागाह बनी हुई है। यही वजह है कि ये चौकड़ी अनंत को बचाने के लिए बेचैन हैं। बिहार में कांग्रेस में जीरो पर रखने का जो टैक्टिकल एलाइंस गोहिल ने नीतीश के साथ मिलकर किया था। उसके एवज में उन्होंने बहुत कुछ खींचा है। उसके अलावा वो अनंत का कर्ज भी उतारना चाहते हैं। निर्दलीय विधायक अनंत सिंह को गोहिल ने ही मदन मोहन झा के साथ बिहार का सबसे शक्तिशाली नेता बताया था और राहुल की गांधी मैदान की रैली को सफल बनाने का पूरा श्रेय उन्हीं को देते हुए टिकट की सिफारिश की थी। वो ऐन मौके पर टीम राहुल के कूदने की वजह से इनका खेल बिगड़ा। अनंत के हाथ से टिकट तो जरूर फिसला, मगर प्रभारी गोहिल, सांसद अखिलेश सिंह, सीएलपी सदानंद सिंह, प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा, प्रेमचंद मिश्रा की चौकड़ी उनकी पत्नी नीलम देवी को टिकट थमाने में कामयाब रही।

अगर सदाकत आश्रम की हवाओं पर ध्यान दें तो ये कोई 25 करोड़ की डील थी। बिहार सरकार अनंत सिंह को शिकंजे में लेना चाह रही थी जिसकी वजह से ये चौकड़ी उनको टिकट दिलाने के लिए बेचैन थी। सूत्रों की माने महीने का लगभग 80 लाख का रंगदारी टैक्स अनंत और उनके गुर्गे वसूलते रहे हैं। इसका एक हिस्सा मदन मोहन झा और गोहिल प्रदेश कांग्रेस की सिचाई के नाम पर खिंचाई करते रहे हैं। लोकसभा चुनाव के बाद कई विधायकों के सांसद बनने की स्थिति के बाद देश भर के कई राज्यों में उपचुनाव होने वाले हैं। इसमें बिहार की पांच विधानसभा सीटों के अलावा और 1 लोकसभा सीट रामचंद्र पासवान की असामयिक निधन की वजह से खाली हुई है। इसमें फिर एक बार ये चौकड़ी टैक्टिकल एलाइंस के जरिए कांग्रेस को जीरो पर लाने का खेल खेलने को उतारू है।

10 दिन पूर्व बिहार प्रदेश अध्यक्ष और इस्तीफा देकर प्रभार संभालने वाले वीरेंद्र सिंह राठौड़ ने सलाहकार मंडल की मींटंग बुलाई थी। इसका बायकॉट 28 सदस्यीय समिति में समीर सिंह को छोड़कर बाकी लोगों ने किया। इस मीटिंग में मौजूद लोगों में अवधेश सिंह, जिन पर नीतीश के समर्थन में विधायकों से दस्तखत करवाने का आरोप है, उनके अलावा दो राष्ट्रीय सचिव होने के नाते चंदन यादव और शकील अहमद पहुंचे थे। बिहार से चार बार से हार रहे और इस बार बुरी तरह पराजित अशोक राम भी पांचवीं बार अपना दावा पेश करने की मजबूरी में मीटिंग में शामिल हुए। शक्ति सिंह गोहिल ने कल कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्षा सोनिया गांधी से शिष्टाचारवश मुलाकात की। लंबे समय से सोनिया से टाइम मांग रहे गोहिल ने मुलाकात के बाद फोटो सोशल मीडिया पर डाल दी। राहुल विरोधी गैंग के प्रेमचंद मिश्रा ने इन्हें पुनः बिहार का प्रभारी बनाकर बधाई दे दी। फिर क्या था, इसी गैंग के दूसरे सदस्य मदन मोहन झा ने भी बकायदा बधाई का संदेश प्रकाशित करवा दिया।

गोहिल जब सोनिया गांधी से मिलकर निकले तो वहां नामचीन एजेंसियों के पत्रकारों के साथ खबरिया चैनलों के पत्रकारों का पूरा दल मौजूद था। इनमें से दर्जनों लोगों से गोहिल ने बात भी की, मगर बिहार प्रभारी दोबारा बनने की कहानी गायब थी। इससे पूर्व पांच बार पार्टी से धकियाए जाने वाले, चुनाव में जमानत जब्त कराने वाले अनुकंपा के आधार पर बने पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता, एमएलसी प्रेमचंद मिश्रा ने सुनियोजित तरीके से प्रचारित किया। खबर लिखे जाने तक ऐसी कोई चिट्ठी एआईसीसी से जारी नहीं की गई है। न ही मीडिया विभाग ने ऐसी कोई आधिकारिक सूचना दी है, न ही संगठन प्रमुख महासचिव केसी वेणुगोपाल के कार्यालय ने ऐसी कोई चिट्ठी जारी होने की कोई पुष्टि की। मामला हवाहवाई शाम होते फुस्स-फुस्स हो गया। सोशल मीडिया पर जहां कुछ लोगों ने गोहिल को बधाई दी, वहीं जमकर कोसने वालों की लंबी फेहरिस्त है।

मदन मोहन झा गोहिल के साथ-साथ अपने पुनर्नियुक्ति की बात भी लोगों को समझा रहे हैं। अपनी इस दोबारा नियुक्ति का प्रचार भी बकायदा करवा रहे हैं। मदन मोहन झा ने सोनिया के निजी सचिव का काम देख रहे माधवन का हवाला देते हुए प्रियंका गांधी द्वारा सोनिया गांधी पर दवाब डलवाकर अपनी कुर्सी पक्की होने का दावा कर रहे हैं। अब वो हाथ में एक लंबी सूची लिए घूम रहे हैं ताकि विरोधी प्रदेश कांग्रेस में अपने एडजस्टमेंट को लेकर चुप्पी साधे रहें। आपको बता दें कि विगत एक साल में मदन मोहन झा ने जिलाध्यक्षों को नियुक्ति का पत्र नहीं दिया है। ब्लॉक या जिला की बात तो छोड़िए जमीनी स्तर पर कांग्रेस सदाकत आश्रम के कागजों पर भी नहीं है। अलबत्ता चुनाव प्रचार के दौरान इन्होंने अपने टैक्सी के कारोबार को खासा चमकाया। अपने खिलाफ मामला दिल्ली दरबार तक नहीं पहुंचे, इसके लिए दिल्ली में अपनी धमक रखने वाले पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष समेत दो-तीन लोगों को भी कुछ हिस्सेदारी दी गई है।

इसका पैसा उम्मीदवारों को मिलने वाले चुनाव फंड के पैसों से जुटा लिया गया है। इसकी शिकायत टिकटार्थियों ने भी की है। मदन और गोहिल खुद को बचाने और अपने नेतृत्व में विधानसभा चुनाव तक खुद को टिकाने व टिकट की चाह में कांग्रेसियों को ठिकाने लगाने का खेल बखूबी खेल सकें। इसी खेल में सलाहकार समिति के फुस्स होने के बाद प्रदेश के दो कार्यकारी अध्यक्षों को बुलाकर वीरेंद्र सिंह राठौड़ ने निर्देश देने की कोशिश की कि गोहिल ने सूची मांगी है।  गोहिल के बिहार में जमने की भूमिका इस बहाने राठौड़ ने बांध दी थी। सोनिया से शिष्टाचार मुलाकात के बाद प्रचारतंत्र के जरिए भुनाने की कोशिश की गई है।ये मसला दस दिन पुराना है। इस बात की पुष्टि प्रदेश के नेताओं ने की। मदन मोहन झा चुनावों के बाद बिहार में आई बाढ़ के राहत पीढ़ितों के नाम पर राहत की खुली लूट सदाकत आश्रम में कर चुके हैं। पिछली बार भभुआ में उपचुनाव में कांग्रेस की जीती हुई बाजी को हार में पलटने का कारनामा ये चौकड़ी दिखा चुकी है।

इन उपचुनावों का प्रदर्शन बिहार कांग्रेस के विधानसभा चुनावों में पार्टी का आधार तय करेगा। यही वजह है कि सरकार चला रहा दल इन सभी उपचुनावों में अपनी जीत सुनिश्चित कराना चाहता है जिसमें मदन मोहन झा उसकी ढाल साबित हो सकते हैं। वे नीतीश सरकार में चहेते मंत्री रहे हैं और सूबे के शक्तिशाली माने जाने वाला विभाग राजस्व बतौर कैबिनेट मंत्री के तौर पर संभाल चुके हैं। नीतीश के साथ अपने संबंधों की आड़ में वे कांग्रेस को कितना बेच पाएंगे, इसका आकलन अभी होना बाकी हैं। कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद सोनिया गांधी संगठन पर खासा ध्यान दे रही हैं। आज शाम अशोक तंवर, दीपा दास मुंशी के साथ-साथ दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष का फैसला करने में जुटी है। इसके बाद मध्यप्रदेश की बारी है, जहां सिंधिया ने कमलनाथ और दिग्विजय समेत अपने ही दल के सरकार चला रहे नेताओं को कड़ी चुनौती पेश की है।

बिहार में भी फैसला जल्द होगा। इन दोनों राज्यों में अशोक तंवर बतौर महासचिव की नियुक्ति हो सकती है, ऐसे संकेत दिख रहे हैं। मदन मोहन और गोहिल की हड़बड़ाहट देखने लायक हैं। इसके पीछे अंतरिम कांग्रेस अध्यक्ष के त्वरित फैसले हैं। तीन दिन पूर्व सोनिया ने यूपी, छत्तीसगढ़ में होने वाले उपचुनावों के उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी। टिकट और एलाइंस के खेल में बड़ा खेल खेलने के ये खिलाड़ी उसी दिन से बेचैन हैं और शिगुफा छोड़कर अपना राजनीतिक धंधा जमाने की फिराक में हैं, जिसे बिगाड़ने का खेल का जिम्मा प्रदेश के कार्यकर्ता, छुटभैये से लेकर बड़े नेताओं ने तय कर लिया है।  अगर शक्ति सिंह गोहिल बिहार के प्रभारी के तौर पर सूबे में उतरेंगे तो बड़े पैमाने पर दिल्ली में उनके खिलाफ बकायदा बड़ा बवाल हो सकता है। इसके संकेत भी सोशल मीडिया में दिख रहे हैं।

अपने पाठकों के साथ गोहिल को भी स्मरण करा दें कि उन्होंने अपने त्यागपत्र में बिहार में हुई बदसलूकी और मारपीट का भी उल्लेख किया था। ये बिहार के पहले प्रभारी हैं जिनको बकायदा सदाकत आश्रम में बड़े नेताओं के सामने पीटा गया था।  इससे पहले कई जगह उनके साथ गालीगलौच और मुक्कालात हो चुकी है। मगर चुनाव परिणाम आने के बाद राहुल को नेता मानने वाले नेताओं का गुस्सा गोहिल और मदन के खिलाफ चरम सीमा पर है। प्रेमचंद के उस्ताद और अध्यक्ष बनने का ख्वाब पाले मुकुल वासनिक की बकायदा 10 जनपथ के अलावा बिहार में भी पिटाई हुई थी। सदाकत आश्रम में और क्या-क्या होना है, इसे ये दोनों खुद की तय करेंगे।

 

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1 Comment

1 Comment

  1. Suni Kumar

    September 6, 2019 at 8:21 pm

    मदन मोहन झा शक्ति सिंह गोहिल, और प्रेमचंद मिश्रा जैसे लोग कांग्रेस पार्टी को पिछले चुनाव में बेंचकर करोड़ों कमा चुके हैं। इस बार भी वही करने वाले हैं। जिसका विरोध हम सभी कार्यकर्ताओं के द्वारा किया जाएगा।

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