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अंतरिम अध्यक्ष बनी सोनिया, किश्तों में कटेंगे अहमद के सियासती बकरे

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कांग्रेस में ढाई महीने से चली आ रही सियासती उठापटक पर सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष पद पर सहमति देते ही पूर्णविराम लग गया। सोनिया को नया अध्यक्ष बनने तक कार्यसमिति के वरिष्ठ नेताओं द्वारा कार्यभार संभालने के लिए राजी किया गया। इससे पूर्व आखिरी प्रयास में देर रात चली मीटिंग में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को सीडब्लूसी के आम राय के लिए पांचों समूह ने प्रदेशों से आए नेताओं की भावनाओं से उनको अवगत कराया गया। जिसमें उनकोे अध्यक्ष पद पर बने रहने का भावनात्मक अनुरोध किया गया था। मगर राहुल अपने फैसले पर डटे रहे और एक बार फिर इंकार करते हुए मीटिंग से बाहर निकल गए।

इसके बाद चली बैठक में मनमोहन सिंह, एंटोनी, वोरा जैसे वरिष्ठ नेताओं की भावनात्मक अपील को सोनिया गांधी से अंतरिम अध्यक्ष बनने की अपील की गई जिसे वे टाल नहीं सकी अपनी सहमति दे दी, लेकिन अपने गुस्से का इजहार भी कर दिया। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सोनिया ने उपस्थित लोगों को कहा कि इस कमरे में ऐसे कई नेता मौजूद हैं जो खुद अध्यक्ष बनने के लिए तिकड़में भिड़ा रहे थे। इन नेताओं ने चुनाव में पार्टी के साथ विश्वासघात किया। उनका इशारा आनंद शर्मा, मुकुल वासनिक, मल्लिकार्जुन खड़गे, शैलजा की तरफ साफ दिखा जो अध्यक्ष बनने के लिए मचले रहे थे। कांग्रेस से अलग होकर इन नेताओं की हैसियत पालिका चुनाव तक जीतने की नहीं है, ये सभी कांग्रेसी मानते हैं।

अहमद के इन गुर्गों का भविष्य अब टीम राहुल तय करेगी। अहमद के ये सियासती बकरे अब किश्तों में कटेंगे जिसके संकेत खुद सोनिया ने अंतरिम अध्यक्ष बनते ही दिए। अब तक राहुल के न चाहते हुए सोनिया इन नेताओं को वर्किंग कमिटी में बचाए हुए थी। कल हुई कार्यसमिति के बैठक में कुल तीन प्रस्ताव पेश किए गए थे। पहले दो प्रस्तावों में राहुल गांधी को अध्यक्ष पद की दावेदारी और उनके अध्यक्षीय पारी की समीक्षा करते हुए उनकी कार्यशैली की तारीफ की गई थी। राहुल के अध्यक्ष पद अस्वीकार कर बैठक से बाहर जाने के बाद तीसरा प्रस्ताव पेश किया गया जिसमें सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष बनने का अनुरोध किया गया। वरिष्ठ नेताओं की बातचीत के साथ उन्होंने मान लिया। सीडब्लूसी में ये भी तय किया गया कि सोनिया की देखरेख में ही नए अध्यक्ष का चुनाव होगा।

इसके पूर्व 8 अगस्त को देर शाम 370 पर चर्चा के लिए आयोजित वार रूम में हुई मीटिंग में इस मुद्दे पर कांग्रेस की 54 सदस्यीय टीम बैठी थी। बैठक में राहुल गांधी ने ही सुझाव दिया था कि धारा 370 के मुद्दे पर राज्यों से आए प्रतिनिधियों को सीडब्लूसी की बैठक में अध्यक्ष पद तय करने के लिए मौजूद रहने का निर्देश दिया गया था। राज्यों के नेताओं से अध्यक्ष पद के लिए चर्चा के लिए पांच जोनल समूह बनाए गए थे। राहुल को पश्चिमी और सोनिया को पूर्वी जोन में शामिल किया गया था, मगर दोनों नेताओं ने खुद को इस प्रक्रिया से अलग कर लिया था। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी उत्तरी जोन, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह दक्षिणी जोन में शामिल थे।

पाठकों को बता दें कि लोकसभा में हुई कांग्रेस की करारी हार की जिम्मेदारी लेते हुए पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस्तीफा सीडब्लूसी में दिया था। जिसको उस समय कांग्रेस कार्यसमिति ने बहुमत के साथ नामंजूर किया था। कांग्रेस अध्यक्ष ने कार्यसमिति में बैठे कुछ सदस्यों के कार्यप्रणाली और संगठन के साथ सौदेबाजी के साथ की गई धोखेबाजी और पारिवारिक की राजनीति को तवज्जो देकर पूरी पार्टी को जीरो पर ला खड़ा किया। ऐसे चेहरों में अशोक गहलोत, कमलनाथ और भूपेश बघेल सरीखे नेताओं का उनका सीधा निशाना था। कुछ महीनों पहले प्रदेश के चुनावों में कांग्रेस ने भाजपा को बेदखल करते हुए इन प्रदेशों पर कब्जा किया था।

राहुल के विश्वासपात्र बने कमलनाथ, गहलोत अब उनसे नजदीक समझे जाने वाले अब उनसे सियासती तौर पर काफी दूर हैं। बेटे की जीत में पूरी कांग्रेस की हार निश्चित करने वाले कमलनाथ तो राहुल के सामने आने से भी कतराते हैं। वहीं राजस्थान को जीरो पर ला खड़ा करने वाले गहलोत पाला बदलकर अब अहमद के साथ हो गए। राहुल गांधी ने चुनावों के दौरान मिले फीडबैक और परिणाम आने के बाद जिम्मेदार लोगों को चिन्हित कर लिया, जिनकी वजह से कांग्रेस को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा।

राहुल ऐसे लोगों को जिम्मेदार पदों से अब मुक्त करना चाहते हैं। राहुल ने इस्तीफा देकर वर्किंग कमिटी के इन सदस्यों पर सामूहिक हार की जिम्मेदारी लेने का दवाब बनाया था। लेकिन कांग्रेस के बिना आधार वाले इन नेताओं ने उनकी भावनाओं को समझने की बजाए उनको ही बाहर रखने की साजिशें शुरू कर दी। राहुल को अध्यक्ष पद पर बने रहने के लिए मनाने वालों में एके एंटोनी, डा मनमोहन सिंह, पी चिदंबरम और उनकी युवा ब्रिगेड जिसकी अगुवाई स्वयं प्रियंका गांधी कर रही थी। उनके साथ जितिन प्रसाद, ज्योतिरादित्य सिंधिया, आरपीएन सिंह, ललितेश त्रिपाठी, दीपेंद्र हुड्डा और जाॅनी-टाॅनी के नाम से प्रसिद्ध रणदीप सुरजेवाला भी शामिल थे।

वेणुगोपाल राहुल की टीम में संगठन के नाम पर सबसे बोगस निकले। चुनावों के दौरान अहमद और मुकुल के इशारे पर संगठन को उनके कार्यकलापों से भारी नुकसान पहुंचा। केरल की राजनीति में वेणुगोपाल मुकुल की शार्गिदी में रमेश चेनितला के विरोधी खेमे की अगुवाई करते रहे हैं। केसी की वजह से चुनावों के दौरान अहमद ने जमकर अपना खेल बनाया और एक बड़े सौदे को अंजाम देते हुए मोदी की जीत की राह आसान कर दी थी। राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद पर मना करने के बाद अहमद खेमा सुनियोजित तरीके से नेहरु-गांधी परिवार पर अपने सिपाहसलारों से लगातार हमले करवाता रहा।

नए-नए नाम अध्यक्ष पद के लिए उछलने लगे। टीम राहुल के सूत्रों की माने तो राहुल गांधी जुलाई के पहले पखवाड़े अध्यक्ष को संभालने को तैयार हो गए थे और अपने साथ सुशील कुमार शिंदे को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस के पुराने नेताओं के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे थे। शिंदे को गांधी परिवार का यसमैन माना जाता है। इस चर्चा के तुरंत बाद अहमद पटेल ने अपने प्यादे खड़गे को आगे कर दिया, लेकिन खिंचाई से अपनी सिंचाई में लगे खड़गे अपनी लोकसभा चुनाव हार गए। उसके बाद अहमद ने मुकुल वासनिक पर दांव लगा दिया। खबरिया चैनलों और अन्य मीडिया में अपने रसूखों के जरिए गहलोत और मुकुल वासनिक की चर्चा को गर्म करना शुरू किया। यहीं से शह-मात का खेल शुरू हुआ जिसमें अहमद को मात हो गई।

धारा-370 के बहाने वार रूम में हुई मीटिंग में अहमद अपनी ताकत को तौलना चाह रहे थे। मीटिंग की शुरूआत से पहले मुकुल के नाम की खबरिया चैनलों ने पुष्टि करते हुए उनके इतिहास और भूगोल को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। मुकुल का अब तक का इतिहास बंद कमरे की राजनीति से शुरू होकर वहीं खत्म हो जाता है। वे कांग्रेस की आंधी-तूफान में अपना चुनाव जीतते रहे। यंू तो वे छात्र संगठन एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के साथ लंबे समय से महासचिव पद पर काबिज हैं, लेकिन आज तक किसी आंदोलन के अगुवा नहीं बन सके। पिछले एक महीने से अहमद मुकुल वासनिक के लिए कांग्रेस के एक-एक एआईसीसी सदस्य को फोन कर वासनिक के पक्ष मंे लामबंद होने के लिए तैयार कर रहे थे।

सोनिया-राहुल-प्रियंका की मौजूदगी में वर्किंग कमिटी की शनिवार सुबह हुई मीटिंग में वर्किंग कमिटी के सदस्य, प्रदेश के अध्यक्ष और सीएलपी लीडरों से आम राय से अध्यक्ष पद के लिए नाम मांगे गए थे। इसके लिए बकायदा 5 ग्रुप बनाए गए थे। इन गु्रपों में प्रदेश के नेताओं से उनकी राय जानी। जहां अहमद के एक महीने के प्रयासों को करारा धक्का लगा, जब सभी नेताओं ने एक सुर से सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी को अध्यक्ष मानने का सुझाव दिया। कार्यसमिति के सदस्यों के बार-बार पूछे जाने पर दूसरे नाम पर केवल सोनिया गांधी के नाम पर ही सहमति जताई गई। कुछ सदस्यों ने राहुल के इंकार की सूरत में प्रियंका के नाम की भी चर्चा की, मगर प्रियंका गांधी ने बकायदा एक चिट्ठी लेकर निवेदन किया था कि उनके नाम पर कोई चर्चा न हो।

अध्यक्ष पद की रेस में अपनी सोनिया की नजदीक बताने वाली कुमारी शैलजा के साथ आनंद शर्मा भी भी दावेदार बन गए थे। बकायदा अलग-अलग प्रदेशों के नेताओं से संपर्क भी साधा जा रहा था। आनंद शर्मा शुक्रवार को देर रात भूपेंद्र हुड्डा को लेकर गुलाम नबी आजाद के घर पर पहुंचे। वहां अहमद भी कुछ देर पहुंचे थे। इन वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ मजबूत उम्मीदवार की चर्चा भी की। सबसे हास्यास्पद दावेदारी आनंद शर्मा की थी जिन्होंने अपनी जिंदगी में एक चुनाव विधायकी के लिए लड़ा था और लगभग 200 वोट लिए थे। जुगाड़ की राजनीति से एजेंटों के खेल से वे राज्यसभा में फिट होते रहे हैं। मुकुल, शैलजा, खड़गे, गहलोत, आनंद शर्मा को अहमद का करीबी माना जाता है।

कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष तय होने के बाद अब प्रदेश में हार के लिए जिम्मेदार नेताओं को चिन्हित कर उनको जवाबदेही से मुक्त किया जाएगा, इसमें कई प्रदेशों के अध्यक्ष, नेता सदन और प्रदेश के प्रभारी, महासचिव और सचिव भी हैं। इन चुनावों में टीम राहुल ने बड़ी पैनी नजर से प्रदेश में सक्रिय नेताओं की भी एक सूची तैयार की है जिनको केंद्रीय और प्रदेश स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी। कांग्रेस अनुच्छेद-370 के बाद बदले माहौल को बेरोजगारी, गिरती अर्थव्यवस्था, किसान-नौजवानों से जुड़े मुद्दों के अलावा बाढ़ एवं प्राकृतिक आपदाओं में सरकारी विफलताओं को सवाल खड़े करेगी, साथ ही 370 पर क्षेत्रीय दलों की भाजपा के साथ जुगलबंदी को भी जनता के बीच बेनकाब करेगी। टीम राहुल का आक्रामक प्लान जल्द ही जनता के बीच जाएगा। राहुल पूरे देश के दौरे पर निकलेंगे और कांग्रेस मैदान में दिखेगी।

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  1. Varun Chandel

    August 13, 2019 at 7:05 pm

    Mr. Ritesh Sinha, I am a local resident of Shimla H.P. and professionally I am an Advocate, pursuing my legal practice in High Court of H.P. at Shimla and also a supporter of Congress ideology. As such always try to be updated myself. After going through your story published here i.e. a newspaper namely Biltz and same has been published in its online account i.e. blitzindiannews.com on dated 11-08-2019. It is unfortunate that your goodself has written/planted this fake story without the support of any proof, vertually which is a hypothetical and seems to be planted at the instant of any political rival in connivance with your goodself and your editor. it is surprising that you have make intentional, willful defamatory remarks against the national leader of Congress Party especially against Mr. Anand Sharma who remained the Union Minister for Commerce and Industry, Textile and Information and Broadcasting of Govt. of India. Also he has been remained as State Minister for External Affairs for Govt. of India. Not only this Mr. Sharma has been elected as Member of Rajya Sabha for four times. As he has been remained on the very important post of Congress Party since early seventies. Presenly he is the Hon’ble Deputy Leader of Rajya Sabha. In the aforesaid news item/story which has been published on 11-08-2019 apart from other hypothetical remarks against the National Leaders of Congress Party, you have intentional, willfully, knowlegly written that Mr. Anand Sharma has got two hundred votes while he is contested the H.P. Assembly Election from Shimla Constituency which is wrong and also beyond the factual position which can always be seems from the official website of the Election Commission of India. The bare perusal of the election results of the legislative elections 1982 would go to show that Mr. Sharma has lost that election only from a very narrow margin after getting the vote of more than nine thousand as he had got the second position in such a close contest. The very reason of the defeat was the corrupt practice adopted by the BJP candidate, which has been proved before the HOn’ble High Court as well as HOn’ble Supreme Court of India and same has been reported in 1984 AIR, 621 and 1984 SCR(2). It has been proved before the Hon’ble High Court that the BJP Candidate had adopted the corrupt practice in the said election to ensured the defeat of Mr. Sharma, as such the Hon’ble Court has been pleased to set aside that election and when the same was challenged before the Hon’ble Apex Court has not only upheld the judgment of Hon’ble High Court of H.P., but also debarred the BJP candidate for next 6 years. Thereafter Mr. Sharma always remained busy in the participation of the various movement of the country and social service. Bare perusal of the said facts would go to prove that your goodself have planted a wrong story wherein the total number of votes casted in favour of Mr. Sharma have been written only two hundred, which is sufficient to prove/believe that your gooself in connivance with the Editor of the said newspaper have planted the said hypothetical/fake story intentionally with the view to ruin the image of the National Leaders of Congress Party particularly against Mr. Anand Sharma who is the known personality as International level he has represented the country before various international forums effectively for many times. Therefore, you both(Mr. Ritesh Sinha & concerned Editor) are hereby called upon to tender publically unconditional apology within fifteen days otherwise appropriate legal action will be taken up against both of you. Please consider it as legal notice on my behalf, apart from a comment which has been sought here.
    Varun Chandel (Advocate, H.P. High Court at Shimla)

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